ठाकुर हेमराज राणा : आज आप सभी श्रद्धालुओं और समाज तक धार्मिक आस्था के एक विशेष क्षेत्र से पुनः अवगत करवाने का प्रयास करेंगे जो विशेष क्षेत्र देव आस्था के रूप में हिमाचल प्रदेश के इतिहास में हमेशा के लिए लोकप्रिय बन चुका है,जिस प्रकार हाल ही में उत्तराखंड से ( न्याय के देवता) छत्रधारी चालदा महासु महाराज जिला सिरमौर के शिलाई विधानसभा क्षेत्र के गांव पशमी में एक वर्ष के लिए विराजमान हो गए हैं,जिन प्रतिष्ठित चारो महासु महाराज की राजधानी उत्तराखंड के (हनोल) को मानी जाती है
चालदा महासु महाराज आने से पूर्व अनेकों चमत्कार इस क्षेत्र में देखने एवं सुनने को मिलते रहे हैं जिसमें कि इससे पूर्व कहां जाता है कि पशमी गांव के लोग ने महासु महाराज के मन्दिर का निर्माण किया जो कि देवता के अनुसार छोटा बताया गया था परन्तु जब शाय़द पशमी गांव और समस्त गिरिपार क्षेत्र पर चालदा महासु महाराज ने कृपा करनी थी तो महासु देवता ने अपनी शक्ति और चमत्कार से जो देवता का बकरा (घांडुवा) जिन्हें उस क्षेत्र में (चिन्ह) कहां जाता है,जिनमें स्वयं देवता की शक्ति विराजमान होती है उनमें से एक देवता का बकरा घांडुवा स्वयं ही बिना किसी व्यक्ति के सेकंडों किलोमीटर उत्तराखंड से हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के पशमी गांव के मन्दिर व गांव में आगमन होता है
यह वाक्या लोकडाऊन के वर्ष 2021-22 से बताया जाता है,जिस देव बकरे को देखकर सामान्यतः गांव वासियो को आभास होता है कि शाय़द शिलाई क्षेत्र के बाली कोटी के महासु मन्दिर से गलती से हमारे गांव में प्रवेश किया है जो कि दो तीन बार इस प्रकार देव घांडुवा इस मन्दिर की परिक्रमा और जैसे निरीक्षण करने पहुंचा हो परन्तु जब कोटी गांव से इस बारे में जानकारी ली गई तो मालूम हुआ कि वहां से कोई भी महासु महाराज का घांडुवा नहीं आया है तो फिर उत्तराखंड में विराजमान न्याय के देवता छत्रधारी चालदा महासु महाराज के मन्दिर में जाकर वज़ीर से वार्तालाप कर देवता का आव्हान किया जिसमें देवता ने कहां कि वह मेरे द्वारा ही भेजा गया घांडुवा बकरा है जिसे आप वापस भेज रहे हैं,जिस चमत्कार से गांव वासी कहीं न कहीं अंजान थे और मैं उस मन्दिर में विराजमान होना चाहता हूं तथा देवता ने गांववासियों को बताया कि अभी मन्दिर छोटा सा बना है इसलिए इस मन्दिर को तोड़कर बढ़ा मन्दिर बनाए जिसमें गांववासियों ने विभिन्न समस्याओं और स्थिति का भी देवता के समक्ष हवाला दिया जिस चिन्ता को महासु देवता ने आश्वस्त किया कि आप इस बात की चिंता न करें हम स्वयं हर व्यवस्था करेंगे जिस देव चमत्कार और शक्ति से गांववासियों के अनुसार हर व्यवस्था कब केसे और किसने की जिसके बदौलत महासु महाराज का भव्य और विशाल मन्दिर बनकर तैयार हुआ,जिसके लिए गांव वासी देवता का चमत्कार और शक्ति ही मानते हैं,जिस पशमी गांव के मन्दिर में न्याय के देवता छत्रधारी चालदा महासु महाराज वि एक वर्ष के लिए राजमान हो चुकें हैं,जिन देव दर्शनों के लिए हजारों श्रद्धालुओं ने अभी तक पशमी गांव के ऐतिहासिक मन्दिर में विराजमान देवता के दर पर अपने जीवन,परिवार, क्षेत्र समाज की तरक्की और किसी भी बाधा से पार पाने के लिए आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं, तो वहीं जब से चालदा महासु महाराज इस मन्दिर में विराजमान हुए हैं तब से प्रतिदिन श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है जिन चमत्कारी और शक्तिशाली देवता के दर्शनों के लिए विभिन्न क्षेत्रों से ही नहीं अपितु अन्य जिलों एवं प्रदेशों से भी श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाकर कृतार्थ हो रहें,
इस प्रकार पशमी गांव का ये मंदिर निसंदेह एक तीर्थस्थल के रूप में विख्यात हो गया है जो छत्रधारी चालदा महासु देवता हमेशा के लिए किसी भी क्षेत्र में नहीं रहते अर्थार्त कुछ वर्षों के बाद किसी अन्य विशेष क्षेत्र की और आगमन करके उस क्षेत्र की बेहतरी और रक्षा करने के लिए प्रस्थान करते हैं ऐसी भी मान्यता क्षेत्र समाज के बुद्धिजीवियों और धार्मिक विद्वानों द्वारा मानी जाती है,तो वहीं क्षेत्र समाज के सभी श्रद्धालुओं और बुद्धिजीवियों ने पशमी गांव के सभी लोगों का आभार व्यक्त कर रहे हैं जिनके लम्बे संघर्ष और विभिन्न प्रकार की देव व्यवस्था बनाने में और वह भी एक छोटा सा गांव होने पर समस्त क्षेत्रवासियों को न्याय के देवता छत्रधारी चालदा महासु महाराज के दर्शनों का सौभाग्य प्राप्त हुआ है और सभी गांववासियों को सफ़ल आयोजन के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं भी प्रेषित कर रहे हैं।यह ऐतिहासिक धार्मिक स्थल शिलाई के मुख्य बाजार से कुछ ही दूरी पर स्थित है जिस क्षेत्र में सड़क की सुविधा उपलब्ध है तो वहीं दूरदराज से आए रहें श्रद्धालुओं के लिए रात्री जागरण के रूप में ठहरने की भी उचित व्यवस्था गांव वासियों के द्वारा की गई है


