गुमराह कर रहा है रेणुका बांध प्रबंधन, पत्र भेजकर विस्थापितों को किया जा रहा गुमराह: संघर्ष समिति

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    श्री रेणुका जी : सिरमौर जिला के रेणुका जी में करीब 7 हजार करोड़ रुपए की लागत से बन रहे रेणुका जी बांध परियोजना के विस्थापितों ने बांध प्रबंधन पर अनदेखी व गुमराह करने के आरोप लगाए। रेणुका के सियूँ में बांध विस्थापितों की एक बैठक हुई जिसमें विस्थापितों से जुड़ी मांगों पर चर्चा की गई।

    करीब 40 मेगावाट की इस परियोजना के बनने से यहां करीब 1142 परिवार विस्थापित हो जाएंगे। बांध विस्थापितों द्वारा बांध निर्माण के कार्यों का विरोध किया जा रहा है और इनका कहना यह है कि इनकी मांगों को ना तो प्रबंधन और ना ही सरकार द्वारा गंभीरता से लिया जा रहा है। रेणुका बांध संघर्ष समिति के अध्यक्ष योगेंद्र कपिला ने बताया कि बांध विस्थापितों के लिए विस्थापन के बाद जो जमीन मिली है उसे लेकर बांध प्रबंधक द्वारा विस्थापितों को गुमराह किया जा रहा है उन्होंने कहा कि विस्थापितों ने मांग की है कि उनकी आवश्यकता के मुताबिक विस्थापितों के लिए जमीनी देखी जानी चाहिए मगर ऐसा नहीं हो रहा है।

    विस्थापितों का कहना है कि बांध प्रबंधन व सरकार की हर बात को विस्थापित द्वारा माना गया है मगर बांध देता भी तो के साथ अन्याय किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जिस जमीन पर कई पुश्तों से वह लोग रह रहे हैं उस जमीन को बांध निर्माण के लिए देकर उन्होंने बड़ा बलिदान दिया है मगर फिर भी इनकी मांगों को नहीं सुना जा रहा है। उन्होंने कहा कि मकान बनाने के लिए सहमति पत्र बांध विस्थापितों से मांगे जा रहे हैं जबकि अभी तक वह जमीन है बांध विस्थापितों को नहीं दिखाई गई जहां मकान बंद है जिसे लेकर विस्थापितों में रोष है।

    गौर हो कि करीब सात हजार करोड़ की लागत से बन रही 40 मेगावाट की इस महत्वपूर्ण परियोजना का खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिलान्यास कर चुके हैं मगर निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ रहा है इसका मुख्य कारण यही है कि यहां से विस्थापित होने वाले लोग अभी नाराज है और निर्माण कार्य का विरोध जता रहे है।

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